Friday 12 February 2010

जग हित शिव का ज़हर पीना जरूरी है

 
लोग कहते हैं जिंदगी तो हुई मौत से बदतर
जीवन प्रतिमान तय करे वो मीना जरूरी है॥

शान ए अमीरी चाहे औरों को नहीं दिखे
गर फट जाए कपड़ा तो सीना जरूरी है॥

जख्म भले कितने भी दर्दभरे और गहरे
जीवन सार है यही कि सीना जरूरी है॥

नीन्द चाहिए शाम को चादर तान करके तो
दिनभर की मेहनत का पसीना जरूरी है॥

साफ लोग दिखते नहीं दुनियावी भीड़ में
गली में रहने वाला क्यों कमीना जरूरी है?

कब तलक चेतना यूँ ही तडफडाती रहेगी
अंधेरों को अब उजाले से हार खाना जरूरी हैं॥

अब स्याह दिनों सी झूठी श्रद्धा नहीं चाहिए
सच्ची इक शिवरात्रि मन जाना जरूरी हैं॥

चाहे पार्वतियां कंठ पकड़ बैठी रहें रात-दिन
जग हित शिव को ज़हर भी पीना जरूरी है॥

बेटों के ही हाथों लुट रही है मेरी मातृभूमि
वतन की फिक्र करें तो 'प्रदीप' जीना जरूरी हैं॥

सभी पाठकों और ब्लॉगर बन्धु बांधवों को शिवरात्रि की सुभकामनाएँ

7 टिप्पणियाँ:

sanjeev said...

bahut khoob!!!
aapko bhi Shivraatri ki hardik shubhkamanayein!!!

विनोद कुमार पांडेय said...

साफ लोग दिखते नहीं दुनियावी भीड़ में
गली में रहने वाला क्यों कमीना जरूरी है?

खूब कहा आपने ..बढ़िया प्रस्तुति..बधाई

varsha said...

अब स्याह दिनों सी झूठी श्रद्धा नहीं चाहिए
सच्ची इक शिवरात्रि मन जाना जरूरी हैं॥
shivratri par mangalkamnaen

संगीता पुरी said...

बहुत सही !!

vickyvyas00677 said...

aapka blog padhkar khushi hui

विश्वनाथ सैनी said...

dada velentain day par maine aisa kya likh diya jo bhabhi ka dar dikha raha...

JJ said...

Amazing...bahut bhadhiya Banna...touches the inner cores...kaafi arsey baad, kuch aisaa padhaa jo mun ki gahariyon ko chhu gaya...

likhney ka shouk rahaa hai apnaa bhei...kabhi mileyn toh, jaroor pakadnaa chaahoonga aapko unhey padhney ke liye:)!

Cheers!