Tuesday 9 February 2010

चाहत...

 
सावन की सी बारिशों में नित भीगने की अब चाह कहाँ,
पुष्प खिले, धरा फले ओ भीगे कंठ इतना सा तो पानी हो

दुनिया जीतने का जज्बा, आसमां चीरने का भी जोश,
कहाँ जाता हैं जब नन्ही सी बेटी से हार खानी हो

ऑस्कर, बुकर और पुलित्ज़र जैसे तमगे किसे चाहिए,
जो सीधे दिल तक उतरे ऐसी मेरी कविता-कहानी हो

रचना यह किसकी? भले कहानी के पात्र हैं कौन?
कोई फरक नहीं पड़ता जब कहने वाली नानी हो

गीत ग़ज़ल छंदों का मौसम, चुका हुआ सा लगता हैं,
मन में ही रहें चाहतें, जब घर में बहन सयानी हो

जब बढ़े अँधेरा, घटे उजाला और चेतना की भी चाह,
कोई बधेतर आस नहीं, बस आँखों में ग्लानी हो

मंदिर बने या मस्जिद? यहाँ इस पचड़े में कौन पड़े,
एक पागल सा खुसरो चाहूं, इक मीरां दीवानी हो

मेरी माँ सी अनिंद्य सुन्दरी इस दुनियां में दूजी कौन,
धरी रहे उपमाएं सारी, जब 'प्रदीप' ने ये ठानी हो

12 टिप्पणियाँ:

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर रचना है बहुत बहुत बधाई।

रचना यह किसकी? भले कहानी के पात्र हैं कौन?
कोई फरक नहीं पड़ता जब कहने वाली नानी हो

Suman said...

मेरी माँ सी अनिंद्य सुन्दरी इस दुनियां में दूजी कौन,.nice

Udan Tashtari said...

मेरी माँ सी अनिंद्य सुन्दरी इस दुनियां में दूजी कौन,
धरी रहे उपमाएं सारी, जब 'प्रदीप' ने ये ठानी हो

-क्या बात है! वाह!

रंजना said...

रचना यह किसकी? भले कहानी के पात्र हैं कौन?
कोई फरक नहीं पड़ता जब कहने वाली नानी हो

kya baat kahi...waah...

bahut hi sundar rachnaa...

dimple maheshwari said...

जिंदगी के चार कदम ना काट यूं ही घिसट घिसट, सीना तान कर चल चाहे चले जीवन दो ही कदम ______

विकास said...

sundar rachna

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सुंदर रचना है.

Yogendra Art Vibration said...

ati sundar..

रश्मि प्रभा... said...

मेरी माँ सी अनिंद्य सुन्दरी इस दुनियां में दूजी कौन,
धरी रहे उपमाएं सारी, जब 'प्रदीप' ने ये ठानी हो
bilkul hi koi nahi, pradeep kee aankhen sahi kahti hain

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' said...

mujhko yah rachna ruchee.

divyanarmada.blogspot.com dekhen, follow karen, tippanee karen.

rewa said...

रचना यह किसकी? भले कहानी के पात्र हैं कौन?
कोई फरक नहीं पड़ता जब कहने वाली नानी हो

Bahut sunder!

Aapne to mujhe meri nani ki yaad dila diya.

Anonymous said...

janokti
प्रदीप जी , नमस्कार !

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