वर्ण तुम्हारा जैसे कंचन
मेरी जिह्वा तू विराजे
चेतना दे जीवन तार दे
माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे ...
तेरे सुयश को गा सकूँ
हर जन्म तुझको पा सकूं
पद कमल को नहला सकूँ
इतना मुझे अधिकार दे
माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे ...
मात मेरी तू मै पुत्र तेरा
तेरे बिन जीवन में अँधेरा
कलम सूखे गर तू न तूठे
इस 'प्रदीप' को तू प्यार दे
माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे ...
बसंत पंचमी पर सभी कलमकारों को बधाइयाँ
- प्रदीपसिंह

5 टिप्पणियाँ:
Waah !!! Ati sundar !!!
Aapke prarthna ke is swar me ham bhi apne swar milate hain aur unse prarthna karte hain ki we sabko sadbuddhi den....
सुंदर रचना
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाये ओर बधाई आप को .
वसंत पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ...माँ की सुंदर स्तुति
प्रदीप जी,
आपको हमारा लिखा पसंद आता है, इसके लिए हम आपके आभारी हैं। आपका ब्लाग देखा तो मालूम हुआ कि आप चुरू के हैं। हम आपको बता दें कि चुरू से हमारा भी गहरा रिश्ता है। हमारी मौसी वहां रहती हैं, हमने भी काफी समय वहां गुजारा है। हम चुरू की होली को कभी भूल नहीं सकते हैं। कभी फिर से मौका मिला तो जरूर आएंगे, वहां आने की काफी समय से तमन्ना है।
प्रदीप जी बधाई पढ़ने वालों को भी दीजिये। कलमकारों की शक्ति उनके पाठक ही हैं।
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